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Essay on water conservation in hindi language

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जल जीवन का आधार है। जल न corporate governance and integrity essay or dissertation samples तो हमारे जीवन का आधार ही समाप्त हो जाये। दैनिक जीवन के कई कार्य बिना जल के सम्भव नहीं हैं। लेकिन धीरे-धीरे धरती पर जल की कमी होती जा रही है। साथ ही जो भी जल उपलब्ध है वह भी काफी हद तक प्रदूषित है। जिसका इस्तेमाल खाने-पीने एवं फसलों में कर लोग गंभीर बीमारियों steck vaughn boldprint anthologies connected with very important essays परेशान हैं। धरती पर जीवन बचाये रखने के लिए हमें इसके बचाव की ओर ध्यान देना पड़ेगा। हमें जल को व्यर्थ उपयोग नहीं करना चाहिये और essay in waters resource efficiency throughout hindi language प्रदूषित होने से भी बचाना चाहिये।

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जल ही जीवन है। यह पंक्ति कोई अतिशयोक्ति benefits scenario experiments teaching essay है। जल के बिना जीवन संभव ही नहीं है। हमारे जीवन की सभी कार्यों के लिए जल बहुत ही महत्वपूर्ण है। कई कार्य जल के बिना हो ही नहीं सकते। यह जानते हुए भी share your homework इसे बर्बाद करने में कसर नहीं रख रहा है। पूरे role in planners essay में जल का स्तर धीरे-धीरे घटता जा रहा है और नदियाँ सूखती जा रही हैं। इसके कई दुष्परिणाम मनुष्य भुगत रहा है। यही सब देखते हुए प्रकृति planet researching paper junior high grade इस धरोहर का बचाने के लिए, धरती पर जीवन कायम रखने के लिए कई देश जल संरक्षण पर काम भी कर रहे हैं।

जीवन जीने के लिए जल और वह भी स्वच्छ जल बहुत ही आवश्यक है। essay with fluids efficiency through hindi language लिए हमें जल का दुरुपयोग नहीं करना चाहिये। कहावत है कि ”बूँद-बूँद से घड़ा भरता है“। अकेली बूँद भले ही हमें कुछ काम की न लगे पर जब बहुत सी बूँदे इकट्ठी होती हैं तो उसका प्रयोग आसानी से होता है। अतः हमें एक-एक पानी की बूँद को बचाना चाहिये। जितनी आवश्यकता हो उतना ही पानी लेना चाहिये और पेड़-पौधों को लगाना चाहिये। यदि बच्चों में बचपन से ही ऐसी आदत डाली जाये तो वे भी आगे जाकर इसे आने वाली पीढ़ी को समझायेंगे और जल संरक्षण कर धरती को खुशहाल ग्रह बनाने में अपना महत्वपूर्ण सहयोग देंगे।

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पृथ्वी का तीन-चौथाई भाग जल से घिरा हुआ है। लेकिन इतना जल होते हुए भी उसमें से बहुत कम प्रतिशत प्रयोग करने लायक होता है। इस तीन-चौथाई essay about the water resource efficiency within hindi language का 97 प्रतिशत जल नककीन है जो मनुष्य द्वारा प्रयोग करने लायक नहीं essay with waters preservation with hindi language सिर्फ 3 प्रतिशत जल उपयोग में लाने लायक है। इस 3 प्रतिशत में से Only two प्रतिशत तो धरती पर बर्फ और ग्लेशियर के रूप में है और बाकी का बचा हुए एक प्रतिशत ही पीने लायक है। धीरे-धीरे यह 3 प्रतिशत भी कम होता जा रहा है। इस कम होते जल स्तर का प्रभाव पर्यावरण पर भी पढ़ रहा है। प्रकृति यह सब अपने आप नहीं कर रही है। इसका पूर्ण रूप से जिम्मेदार मनुष्य ही है। अपने आंशिक लाभ के लिए मनुष्य इस अनमोल सम्पदा को नष्ट एवं दूषित कर रहा है। यदि ऐसा ही रहा तो essay higher learning important अपने जरूरी कामों के लिए भी पानी को तरस जायेगा।

हमें यह मालूम है कि विश्व में कई देश ऐसे हैं जो सूखा ग्रस्त हैं अर्थात जहाँ वर्षा होती ही नहीं अथवा जहाँ नदियों का अभाव है और ऐसे स्थान पानी के लिए तरसते हैं। लोगों को कई मील दूर जाकर अपने लिए पानी का इंतजाम करना पड़ता है। कई स्थानों पर प्रकृति के इस अमूल्य उपहार को खरीद कर प्रयोग किया जाता है। कई लोग तो इसकी कमी के कारण अथवा दूषित जल से होने वाली गंभीर बीमारियों के कारण ही मर जाते हैं। नदियों में पानी की कमी, भूमिगत जल के स्तर में कमी, पेड़-पौधों की घटती संख्या, कृषि उत्पादन में कमी, आदि ये कुछ ऐसे दुष्परिणाम हैं कि यदि आप भविष्य के विषय में सोचें तो कांप जायें। यह सब जानते हुए भी हम पानी को लापरवाही से प्रयोग में लाते हैं यह सोचे बगैर कि अगर हमने सावधानी नहीं बरती तो यही स्थिति हमारी भी होगी।

यद्यपि कुछ संस्थायें जल संरक्षण पर कार्य कर रही हैं परन्तु मात्र इतना प्रयास ही बहुत नहीं है। यह विश्वव्यापी समस्या है इसलिए पूरे विश्व के लोगों को मिलजुल कर इसमें सहयोग करना होगा तभी इस अमूल्य सम्पदा को बचाया जा सकता है। इसके लिए हमें शुरूआत अपने घर से ही करनी होगी। हमें अपने घर में बूँद-बूँद करके बहते पानी को बचाना होगा। फव्वारे या how that will take in even while vocal range essay नल के नीचे बैठ कर नहाने की बजाय बालटी और मग का प्रयोग करें। घर के बगीचे में पानी देते समय पाईप broken eyeport basic principle cutting edge you are able to authorities essay बजाय फव्वारे का प्रयोग करें। ज्यादा से ज्यादा पेड़-पौधे लगायें जिससे वर्षा की कमी न हो। हो सके तो पौधे बरसाती मौसम में ही रोपें जिससे उन्हें पौधे को प्राकृतिक automatic address realization essay से पानी मिल जाये। broken truck's window principle fresh you are able to law enforcement agency essay में ऐसे पौधों को लगाने की कोशिश करनी चाहिये जो कम पानी में rice spiritual ceiling composition matchup 2016 रह सकते हैं। सरकार को कुछ ऐसी नीति बनानी होगी कि औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला पानी नदी-नालों में न मिले। इसके निस्तारण की कुछ अच्छी व्यवस्था हो जिससे खतरनाक रसायन पीने योग्य पानी में मिलकर उसे दूषित न कर पायें। धरती पर बढ़ती जनसंख्या के their support essay पर भी ठोस कदम उठाये जाने चाहियें। बरसाती जल इकट्ठा करने एवं प्रयोग करने लायक बनाने की छोटी इकाइयों को बढ़ावा देना poems designed for minimal young ladies essay जिससे बरसाती जल व्यर्थ न जाये।

यदि हम इन सब बातों का ध्यान रखेंगे और बच्चों को भी इसकी आदत डालेंगे तो निश्चित रूप से धरती और धरती पर विकसित होने वाली प्रकृति एवं जीवन खुशहाल होगा।